kaal sarp dosh Shanti-nivaran upay in hindi.-कालसर्प दोष शांति के सरल संत सिद्ध उपाय हिंदी |

kaal sarp dosh Shanti-nivaran upay in hindi.  |कालसर्प दोष शांति के सरल संत सिद्ध उपाय हिंदी 


kaal sarp dosh Shanti-nivaran upay in hindi.

kaal sarp dosh Shanti-nivaran upay in hindi. 



जातक की कुंडली में यदि कालसर्प योग विद्यमान होता है। तो जातक का जीवन में अत्यधिक संघर्ष करना पडता है। लेकिन व्यवहार में यह भी पाया गया है कि जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प योग है उन्हें उनके जीवन में संघर्ष और अवरोध के बावजूद भी कार्यक्षेत्र में आश्चर्य जनक सफलता यश और प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती देखी गई है।

जिन जातको को कालसर्प योग के कारण जीवन में असफलताये मिल रही है और कठिन मेहनत करने के बाद भी सफलता नही मिलती उन जातको के लिये एक संतो का अनुभव सिद्व उपाय नीचे दिया गया है। इस उपाय को करने से कालसर्प से पीडित जातक के जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। उसके कैरियर, विवाह और जीवन में आश्चर्यजनक सफलता मिलने लगती है।

उपाय कैसे करें- किसी भी सोमवार से इस उपाय को किया जा सकता है। इसके लिये आप मार्केट से चन्दन का इत्र या सेन्डल परफयूम लेकर आना है। अब आपको नीचे दिया गया राहुकाल के समय शिव जी के मन्दिर में शिव लिंग पर चन्दन का इत्र लगाना है। और इस नीचे दिये गये मंत्र का रोजाना पांच बार पाठ करना है। यह उपाय केवल राहुकाल के समय ही करना है।


ऊ नमः शिवाय।


ऊ नाग कुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।



नमः शिवाय ऊ नमः शिवाय नगेन्द्र हाराय ऊ नमः शिवाय।

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्वाय दिगम्बराय तस्मै ‘न‘ काराय नमः शिवाय  ।।1।।



मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय  



नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।



मन्दारपुष्पबहुपुष्प सूपूजिताय, 
तस्मै ‘म‘ काराय नमः शिवाय ।।2।।


शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द- सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय, तस्मै ‘शि‘ काराय नमः शिवाय ।।3।।

वसिष्ठ कुम्भोद्ववगौतमार्य-मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय, तस्मै ‘व‘ काराय नमः शिवाय ।। 4 ।।

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय, तस्मै ‘य‘ काराय नमः शिवाय।।5।।

पच्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।6।।


हिन्दी अनुवाद- जो कोई मन्दिर भगवान शिव लिंग के समीप उनके इस पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करता है, उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है। और वहाॅं वह शिव के साथ प्रसन्न रहता है।


राहुकाल का समय ज्ञात करें।

रविवार- शाम 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक।
सोमवार- सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक।
मंगलवार- दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजकर 30 मिनट तक।
बुधवार- दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक।
गुरूवार- दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक।
शुक्रवार- प्रातः 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक।
शनिवार- प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक।

विशेष कथन- सूर्याेदय में 5 मिनट से 30 मिनट तक अन्तर होता है। इसलिये अपने शहर के सूर्योदय के अनुसार राहुकाल का समय निश्चित कर लें।

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