जैसी दॄष्टि वैसी सृष्टि। TOP 10 Motivation Tips,






जैसी दॄष्टि  वैसी सृष्टि। 
TOP 10 Motivation Tips, 

Creation such as vision.

जिसका दृष्टिकोण जैसा होता है, उसे दुनिया वैसी ही दिखाई देती है। दुनिया तो एक ही है। यदि लाल रंग के लेंस वाले चश्मे से देखें तो लाल दिखाई देगी और हरे रंग के लेंस वाले चश्में से देखें तो हरी दिखाई देती है। दुनिया में अच्छाई भी हैं और बुराई भी। देखना यह है कि हमारी दृष्टि किस पर रहती है,अच्छाई पर या बुराई पर। अच्छाई देखने का अभ्यासी बुरी से बुरी वस्तु में भी अच्छाई देख लेता है और बुराई देखने का अभ्यासी हर अच्छाई में बुराई को खोज लेता है
 TOP 10 Motivation Tips,





जैसी दॄष्टि  वैसी सृष्टि। 
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। भगवान कृष्ण ने दुर्याेधन से पूछा-दुनिया में कोई सज्जन व्यक्ति है। दुर्याेधन बोला-नही, दुनिया में कोई सज्जन व्यक्ति नही है। भगवान ने युधिष्ठिर से पूछा- दुनिया में कोई दुर्जन व्यक्ति है। युधिष्ठिर बोले-नही, दुनिया में कोई दुर्जन व्यक्ति नही है। ऐसा इसलिए हुआ कि दुर्योधन का दृष्टिकोण बुराई खोजने वाला है और युधिष्ठिर का अच्छाई खोजने वाला। दुनिया तो जैसी है वैसी ही है। इसमें अच्छाई बुराई की अपेक्षा अधिक है, लेकिन बुराई खोजने वाले व्यक्ति बुराई ही खोज लेते है। भगवान दत्तान्नेय ने 24 गुरू बनाए। उनके गुरूओं में कौआ,साॅप,वेश्या जैसे निष्कृष्ट जीव भी थे, लेकिन उनकी पविन्न दृष्टि ने उनमें भी अच्छाई खोजी, उसे ग्रहण किया, इसका आभार माना और उसे गुरू बनाया । हम स्वंय जैसे होते हैं, वैसे ही सोचते हैं, वैसे ही खोजते हैं और वैसा ही दुनिया को लौटाते हैं।

एक गिलास आधा पानी से भरा है। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति कहेगा कि गिलास आधा पानी से भरा है और आधा हवा से। नकारात्मक दृष्टिकोण वाला व्यक्ति खालीपन को ही देखेगा। वह कहेगा कि गिलास आधा खाली है। उसे कमी ही दिखाई देती है। जो है वह दिखाई नही देता, जो नहीं है वह दिखाई देता है। उच्च श्रेणी का श्रेष्ठ दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति हर कमी में, हर हानि में भी लाख देख लेते हैं। नारदजी की माॅ और नरसी भगत के पुन्न का स्वर्गवास हो गया, लेकिन दोनों प्रसन्न थे। माॅ और पुत्र  की जिम्मेदारियो के कारण भगवान का काम कम हो पाता था। भगवान ने यह व्यवधान दूर कर दिया । यही सकारात्मक सोच प्रसन्नता का कारण थी। एक बच्चा स्कूल में इस वर्ष फेल हो गया। माॅ बोली- कोई बात नही, इस वर्ष पुस्तकें नही खरीदनी पडेंगी। हानि में भी लाभ देखने का दृष्टिकोण।

दो लडके ट्रैन  में यात्रा  कर रहे थे। डिब्बे में उन दोनों के अतिरिक्त एक आदमी और बैठा था। एक लडका बोला कि बिना कारण जंजीर खींचने पर 250 रूपये जुरमाना होता हैं दूसरा लडका बोला- कभी जंजीर खींचकर देखी नहीं है कि कैसे गाडी रूकती है? पहला लडका बोला-250 रूपये जुरमाना हो जाएगा। दूसरा लडका बोला- 100 रूपये तो मेरे पास हैं। पहला बोला- 100 मेरे पास भी हैं। 50 रूपये और होते तो जंजीर खींचकर गाडी रोकते। दूसरा बोेला- जो होगा देखा जाएगा। जंजीर खींच देते है। यह कहकर जंजीर खींच दी। तीसरे व्यक्ति ने यह सब सुना देखा। गाडी रूकी ,गार्ड और पुलिस वाले उसी डिब्बे में आए और पूछा - जंजीर किसने खींची है? दोनों चुप रहे। तीसरा व्यक्ति बोला- जंजीर हमने खींची है।

 गार्ड ने पूछा- क्यों खींची है। ? वह व्यक्ति बोला - हमारे पास दो सौ रूपये थे। इन लडकों ने हमसे छुडाकर सौ-सौ रूपये बाॅट लिए हैं। पुलिस ने तलाशी ली तो 100-100 रूपये दोनों पर निकले। वे पैसे तीसरे व्यक्ति को दे दिए और गार्ड व पुलिस वाले चले गए। गाडी चल पडी। दोनों लडके बडे जोर से हॅसे । तीसरे व्यक्ति ने पूछा- तुम लोग हॅस क्यों रहे हो? दोनो बोले- अब 200 रूपये में ही काम चल गया। 50 रूपये का लाभ हो गया,इसलिए हॅस रहे हैं। यह है हानि में भी लाभ देखने का दृष्टिकोण।

साभार -युग निर्माण योजना मथुरा 
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